History of Deepawali. Diwali kyu mnaai jati hai.

तो दोस्तों दीपावली को दीपो का त्योहार भी कहा जाता है। इस दिन हर एक भारतीय के घर में आपको लाइटों से ज्यादा दियो और मोमबत्तियों की रौशनी देखने को मिलती है। इस दिन हर एक आदमी अपने घर को दुल्हन की तरह सजाता है। लेकिन दोस्तों बहुतो को पता तक नहीं है की हम दिवाली को मनाते क्यों है। तो इस पोस्ट के जरिये हम जानेंगे History of Deepawali Festival  वो भी हिंदी में तो चलिए जान लेते है की क्यों हम दिवाली को मनाते है।

History of Deepawali feastival

History Of deepawali

                                                                                  तो दोस्तों बात बहुत पुरानी है जब केकयी माता ने श्रीरामचन्द्र जी को 14 वर्ष के लिए वनवास के लिए वन  में जाने को कह दिया था।
  और श्रीराम जी ने खुसी खुशी उनकी आज्ञा का पालन किया और वो वन में जाने के लिए राज़ी हो गए थे उन्हें वन  में तो अकेले ही जाना था
 लेकन जब माता सीता को पता चला की उनके श्रीराम को 14  वर्ष का वनवास दे दिया है।
  तो वो भी  श्रीराम के साथ जाने की जिद करने लगी।


  अब माता सीता की जिद के सामने श्रीराम जी की एक न चली।  और वो माता सीता को अपने  साथ ले जाने को मान गए।  
लेकिन जब भ्राता लक्ष्मण को यह बात पता चली की उनके बड़े भाई और उनकी भभी 14 वर्ष का वनवास काटने के लिए  वन में जा रहे है तो महलो की ऐशोआराम छोड़कर लक्ष्मण भी अपने अपने भाई के साथ  जाने की जिद करने लगा।  


अब लक्ष्मण श्रीराम के छोटे भाई  थे  तो वो उनकी बात को भी टाल न सके।  और लक्ष्मण को भी अपने साथ चलने की आज्ञा दे दी। 
अब वन में जाने के लिए तीनो त्यार हो चुके थे।  माता कैकेयी की आज्ञा को पाकर और सही  समय को देखकर तीनो वन के लिए चल पड़े। 
वन में आने के बाद उन्होंने एक नदी के किनारे अपना छोटा सा घर बसाया।  उसमें तीनो आराम से रहने लग गए।  लेकीन  एक दिन जब श्रीराम और उनके छोटे भ्राता जब वन में शिकार को गए थे 


तो उनकी मुलाक़ात एक स्री से हुई।  जिसका नाम शूर्पणखा था हां दोस्तों अपने यह नाम जरूर सुन रख होगा। शूर्पणखा ने जब श्रीराम को वन में देखा तो वो उन्हें देखकर मोहित हो गयी।


  और जाकर उनके सामने विवाह का प्रस्ताव रखा।  लेकिन श्रीराम का विवाह तो माता  सीता के साथ हो चूका था।  इसलिए उन्होंने शूर्पणखा को एक बार अपने भाई लक्ष्मण से बात करने को कहा, 
               अब लक्ष्मण सवभाव से अत्यधिक क्रोधित थे वो विवाह का नाम सुनकर और भी ज्यादा क्रोधित हो गए।  और उन्होंने क्रोध में आकर शूर्पणखा की नाक को काट दिया।  


इस अपमान को शूर्पणखा सहन ना कर सकी और उसने जाकर अपनी भाई लंकेशवर को सारी  बात बता दी।
 अब  शूर्पणखा का भाई लंका का राजा था और कोई राजा की बहन का अपमान इस कदर करे यह बात लंकेशवर से सहन ना हुई।  


उसने श्रीराम और लक्ष्मण से बदला लेनी की तरकीब सोची और माता सीता का अपहरण करने की तरकीब  अपने दिमाग में बनाई। 
 अपनी बनाई हुई तरकीब के साथ  लंका का राजा माता सीता का अपहरण करने को चल पड़ा। 

और अपनी बनाई हुई तरकीब में वो माता सीता का अपहरण करने में कामयाब भी हो गया।


  माता सीता का अपहरण करके वो माता को अपनी नगरी लंका में ले आया।  
माता सीता की अपहरण की बात को सुनते ही दोनों भाई माता को ढूढ़ने को चल पड़े।  चलते-चलते उनकी मुलाकर बहुत से लोगो से हुई जो  श्रीराम के  दर्शन को पाकर धन्य हो गए थे।  


अब वो श्रीराम  का साथ छोड़ना  नहीं चाहते थे।  और हमेशा श्रीराम  के साथ ही रहना चाहते थे।  तो  प्रभु ने उनको अपनी  शरण में ले लिया  और सब लोग प्रभु के  साथ माता की खोज  करने में व्यस्त हो गए।  समय बीतता गया और वो सब लंका के करीब भी पहुंच गए थे  


लेकिन लंका में जाने के लिए पहले उन सब को समंदर को पार करना था।  प्रभु की कृपा से उन सब ने लंका को भी पार कर लिया। 
 लंका के राजा रावण के साथ बहुत से युद हुए जिसमें रावण ने अपने बहुत से वीर योद्धा को भेजा परन्तु उसकी हर बार सिर्फ हार का सामना करना पड़ा।  

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Ravan Ki haar

अब  आखिरी रात का समय आ चूका था जिसमें अगले दिन स्वयं रावण को श्रीराम जी का सामना करना था और अगले दिन रावण ने श्रीराम का सामना किया  भी लेकिन इस बार भी रावण को फिर से हार का सामना करना पड़ा

 और इस युद में वो श्रीराम के हाथो मारा गया।  लेकिन उसके मर जाने के बाद श्रीराम जी ने एक बहुत ही अछि बात कही की रावण की पराजय इस कारण हुई क्युकी उसका भाई उसके साथ नहीं खड़ा था 

 और मेरी इस युद में जीत इसी कारण हुई क्युकी मेरा भाई मेरे साथ खड़ा है  दोस्तों दुनिया की कोई भी ताकत  आपको नहीं हरा सकती अगर आपके साथ आपका भाई नहीं  खड़ा है

 तो आपको इस दुनिया की कोई भी ताकत आपको जीता नहीं सकती दोस्तों हमे रामायण से बहुत-सी बाते सिखने को मिलती है मेने रामायण से यही बात सीखी अपने कोनसी बात सीखी कमेंट में जरूर बताना।  


तो दोस्तों जिस दिन  श्रीराम ने रावण को मारा था उसे दिन बुराई पर अच्छाई की जीत  हुई थी इसी दिन की  याद में दोस्तों दसहरा मनाया जाता है
 इस दिन का नाम दशेहरा इस लिए पड़ा क्युकी रावण के दस सर थे रावण को मारने के बाद श्रीराम के 14 वर्ष का वनवास भी पूरा हो चूका था तो उनको जाने में लगभग 21 दिन समय लगने वाला था। 


  श्रीराम भक्त श्रीहनुमान जी ने अपने कंधो पर श्रीराम माता सीता और लक्ष्मण को बैठा कर आयोध्या वापस लाये। लंका से आयोध्या तक वापस आने में हनुमान जी को लगभग 21 दिन का समय लगा था इसीलिए दिवाली को दशहरे के 21 दिन बाद मनाया जाता है 

राज्याभिषेक:

जब श्रीराम आयोदय वापस आये थे तो सभी आयोध्या वासियो ने उनका स्वागत घी के दियो को जलाकर किया था क्युकी वह अन्धकार पर प्रकाश का दिया जलाकर  वापस आये थे।


  सभी लोगो ने श्रीराम के आने की खुशी मनाई थी और उनका राज्य अभिषेक भी किया गया।  अब आयोदय की राजगद्दी श्रीराम के हाथो में थी।  
वो आयोध्या के नए राजा थे। 

सारा आयोध्या खुशियों से भरपूर हो गया हर जगह खुशी और उल्लास का  माहौल था श्रीरामचन्द्र जी के आने से मानो आयोध्या की खुशिया भी वापस लौट आयी हो।  

दीवाली क्यों मनाई जाती है ( happy diwali 2021)

इसी दिन की याद में हर घर में दिवाली मनाई जाती है ताकि आयोध्या की तरह हर घर में खुशी आ जाये और सभी की जिंदगी में जितना भी  अंधकार है 


उस पर प्रकश की ज्योति जल जाए। इस दिन को भारत में  ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में मनाया जाता है और हर जगह खुशी का माहौल होता है हर कोई दिवाली को अपने तरिके से celebrate करता है


 इस दिन माता लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है क्युकी माना  जाता है की इस दिन माता लक्ष्मी अपनी भक्तो पर धन की कृपा जरूर करती है
 और उनकी आर्थिक तंगी को दूर करके उन्हें घरो में धन के आने के राश्ते खोल देती है  


 तो दोस्तों आप अपनी दिवाली किस तरह से मनाते है कमेंट में जरूर बताये। और दिवाली से सम्बंदित कंटेंट के लिए आप हमारी वेबसाइट पर आ सकते है 
आपको अगर ये पोस्ट अछि लगी हो तो आप अपने दोस्तों के बात इसे शेयर भी कर सकते है। 

  

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